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क्या आप जानते है Election commission of India जो इन दिनों चर्चा का विषय बना है…?

Election Commission of India (चुनाव आयोग) की भूमिका, वर्तमान में उठ रहे विवाद (विशेषकर बिहार की SIR प्रक्रिया) और free and fair elections सुनिश्चित करने के लिए सुझाव शामिल हैं।

भारत में चुनाव आयोग: लोकतंत्र की रक्षक

  1. परिचय: संविधानिक संरक्षक

Election Commission of India (ECI) एक संवैधानिक संस्था है, जिसे भारत के संविधान (अनुच्छेद 324) द्वारा संसद, विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों का नियंत्रण व संचालन सौंपा गया है ।
यह आयोग मतदाता सूची तैयार करने, प्रत्याशी नामांकन की समीक्षा, चिन्ह आवंटन, মॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू करने, और चुनाव व्यय की निगरानी जैसे कार्य करता है ।


  1. वर्तमान स्थिति: बिहार में SIR विवाद और प्रतिक्रिया

A) SIR यानी Special Intensive Revision का संचालन

24 जून 2025 को आयोग ने बिहार की मतदाता सूची में व्यापक SIR प्रक्रिया शुरू की । इसमें सिर्फ 11 विशेष दस्तावेज मान्य माने गए, लेकिन आमतौर पर उपयोग होने वाले जैसे Aadhaar, वोटर आईडी और राशन कार्ड शामिल नहीं थे। इसका समय सीमित (31 जुलाई तक) होने और बड़ी संख्या में प्रवासी, गरीब, वंचित, और अल्पसंख्यकों को छूटना चिंता का विषय बना ।
रिपोर्ट के अनुसार, SIR के बाद बिहार की मतदाता संख्या लगभग 65.6 लाख कम होकर 7.24 करोड़ रह गई ।

B) सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

14 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने 65 लाख हटाए गए मतदाताओं की सूची (जिले व बूथ स्तर पर) और हटाने के कारण सार्वजनिक करने का निर्देश दिया। साथ ही, Aadhaar और EPIC को आपत्ति दर्ज करने के वैध दस्तावेज बनने के निर्देश भी दिए गए ।
इसके बाद, आयोग ने 56 घंटे के भीतर यह सूची अपलोड कर दी और दावा किया कि प्रक्रिया पारदर्शी रूप से संचालित हो रही थी ।

C) विपक्ष की प्रतिक्रिया और विरोध

भारत (INDIA) ब्लॉक और राहुल गांधी ने “vote chori” (मत चोरी) की आलोचना करते हुए “Voter Adhikar Yatra” शुरू की, जिसमें उन्होंने विपक्षी एकता दिखाते हुए जनता को आंदोलन में शामिल होने के लिए बुलाया ।

राहुल गांधी ने आयोग पर 2023 के कानून के जरिए आयोग को सुरक्षा देने, प्रत्येक दल से अलग मापदंडों पर कार्रवाई करने, और वोटर सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाया ।

दिग्विजय सिंह ने मांग की है कि यदि हटाए गए वोटर सही हैं, तो आयोग उन्हें सार्वजनिक करे ।

CEC Gyanesh Kumar ने विपक्ष द्वारा फैलायी जा रही “misinformation” पर चिंता जताई और SIR प्रक्रिया का बचाव किया ।

INDIA ब्लॉक ने आम चुनावों में तक लोकसभा भंग करने की मांग भी उठाई और कहा कि वोटर सूची “clean” होने पर ही वे आयोग की कार्यवाही का पालन करेंगे ।


  1. क्यों यह महत्वपूर्ण है?

लोकतंत्र की विश्वसनीयता: वोटर सूची में व्यापक कमी से लोगों का आयोग पर भरोसा टूट रहा है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं।

वंचितों की सहभागिता: गरीब, प्रवासी, अल्पसंख्यक वंचितों को मतदान से वंचित किया जाना संवैधानिक अधिकारों का हनन है।

भविष्य के लिए मिसाल: इस विवाद से निकलने वाला समाधान चुनाव आयोग की जवाबदेही और पारदर्शिता के लिए एक मिसाल बन सकता है।

  1. सुझाव: क्या सुधार किए जा सकते हैं?
  2. मान्य दस्तावेजों में सुधार

आम दस्तावेज जैसे Aadhaar, वोटर ID, राशन कार्ड को प्रमाण पत्र के रूप में शामिल करें, ताकि अधिक से अधिक लोग प्रक्रिया में शामिल हो सकें।

  1. पारदर्शिता बढ़ाएँ

मतदाता सूची को ऑनलाइन, मोबाइल ऐप और बूथ स्तर पर उपलब्ध कराएँ। हटाने के कारण स्पष्ट रूप से बताएं और व्यापक मीडिया (स्थानीय भाषा में) में प्रचार करें।

  1. निजीकरण और निरीक्षण प्रणाली

SIR जैसी प्रक्रियाओं के लिए एक स्वतंत्र पर्यवेक्षक समिति बनाएं, जिसमें न्यायपालिका या नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल हों।

  1. आपत्ति व निपटान प्रक्रिया आसान बनायें

Aadhaar/EPIC के आधार पर मतदाता अपनी आपत्तियाँ दर्ज कर सकें। उम्मीदवारों और पक्षों को समान स्तर पर कार्रवाई के लिए जवाबदेही तय हो।

  1. मोबाइल एवं कोविड-पर्यावरण अनुकूल उपाय

प्रवासी और दूरदराज स्थित मतदाताओं के लिए मोबाइल पुन: पंजीकरण यूनिट, शिविर या ऑनलाइन आवेदन विकल्प दें।

  1. आयोग की जवाबदेही और चयन प्रक्रिया में सुधार

चुनाव आयोग चयन प्रक्रिया में व्यापक पारदर्शिता होनी चाहिए; उदाहरण के लिए, 2023 के कानून की समीक्षा और सुधार पर विचार करना।


चुनाव आयोग भारत के लोकतंत्र की रीढ़ है। बिहार SIR विवाद और सुप्रीम कोर्ट का आदेश एक मौका है—इसकी जिम्मेदारी, जवाबदेही और पारदर्शिता सुधारने का। सुधारात्मक कदम उठाकर आयोग फिर से राजनीतिक तटस्थता और लोकतांत्रिक विश्वास लौटाने में सक्षम हो सकता है।

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