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जानिए रक्षाबंधन का शुभ समय क्या है ?

रक्षाबंधन 2025 में राखी बाँधने का शुभ समय:
तिथि: शुक्रवार, 8 अगस्त 2025

श्रावण पूर्णिमा प्रारंभ: 8 अगस्त को सुबह 10:38 बजे

श्रावण पूर्णिमा समाप्त: 9 अगस्त को सुबह 07:45 बजे

📿 राखी बाँधने का शुभ मुहूर्त (अवधि):
🕓 दोपहर 01:42 बजे से शाम 04:18 बजे तक
(यह मुहूर्त भद्रा काल के समाप्त होने के बाद है। भद्रा में राखी नहीं बाँधी जाती।)

📛 भद्रा काल:
सुबह 10:38 बजे से दोपहर 01:42 बजे तक
👉 इस समय राखी बाँधना वर्जित होता है।

रक्षाबंधन – एक धागा, एक वादा
भारत त्योहारों की भूमि है, जहाँ हर पर्व एक गहरी सांस्कृतिक जड़ और भावनात्मक जुड़ाव से जुड़ा होता है। इन्हीं में से एक है रक्षाबंधन – भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक।

रक्षाबंधन, जिसे प्यार से “राखी” भी कहा जाता है, हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बाँधती हैं और उनके अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और सफलता की कामना करती हैं। बदले में भाई उन्हें जीवनभर सुरक्षा देने का वादा करते हैं और उपहार देते हैं।

त्योहार की तैयारी
रक्षाबंधन सिर्फ एक दिन का नहीं, बल्कि इसकी तैयारियाँ कई दिन पहले से शुरू हो जाती हैं। बाज़ारों में रंग-बिरंगी राखियाँ, मिठाइयाँ और उपहारों की भरमार होती है। बहनें खास राखियाँ चुनती हैं – कुछ पारंपरिक, कुछ डिज़ाइनर। वहीं भाई भी इस दिन को यादगार बनाने के लिए उपहार सोचते हैं – कपड़े, गहने, या फिर डिजिटल गिफ्ट कार्ड।

बदलते दौर में बदलता रक्षाबंधन
आज के डिजिटल युग में जब बहन-भाई अलग-अलग शहरों या देशों में रहते हैं, तब भी इस पर्व की भावना कमजोर नहीं हुई है। ऑनलाइन राखियाँ, वीडियो कॉलिंग, और ई-गिफ्ट्स के माध्यम से यह रिश्ता और मजबूत हो रहा है। तकनीक ने दूरी को मिटा दिया है, भावना को नहीं।

केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं
रक्षाबंधन अब सिर्फ भाई-बहन तक सीमित नहीं रहा। कई जगहों पर लड़कियाँ अपनी बहनों को भी राखी बाँधती हैं, या फिर अपने प्रियजनों, दोस्तों, यहाँ तक कि सेना के जवानों को भी। यह सिर्फ खून का रिश्ता नहीं, बल्कि विश्वास और प्यार का प्रतीक बन चुका है।

समय के साथ नयी सोच
पुराने ज़माने में रक्षाबंधन को महिला की सुरक्षा से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन आज इसकी परिभाषा बदल रही है। अब यह एक दूसरे की इज़्ज़त, आज़ादी, और सपनों की रक्षा करने का वादा है। भाई अब सिर्फ रक्षक नहीं, सहयोगी और साथी भी हैं।

एक व्यक्तिगत अनुभव
मेरे लिए रक्षाबंधन सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि यादों का पुल है। बचपन में मिठाइयों के लिए राखी बांधना, और आज एक दोस्त की तरह भाई से बातें करना – यह रिश्ता वक्त के साथ और गहरा होता गया है। जब बहन राखी बांधती है, तो लगता है जैसे एक अदृश्य कवच मिल गया हो।

रक्षाबंधन एक ऐसा पर्व है जो हमें यह याद दिलाता है कि रिश्ते सिर्फ खून से नहीं, दिल से बनते हैं। यह त्यौहार हमें हर साल यह सिखाता है कि प्यार, भरोसा और साथ, जीवन की सबसे बड़ी ताकत है।

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